Museum- BRAJ FORK ART AND CRAFT MUSEUM
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ब्रज लोक कला एवं शिल्प संग्रहालय

भारतीय संस्कृति को ब्रज संस्कृति का आधार बताया गया है। ब्रज संस्कृति ने मानव जीवन के बदलते स्वरूप को समय-समय पर प्रस्तुत किया है किस प्रकार से मानव ने जीवन यापन करने के लिए कैसे-कैसे परिवर्तन समय-समय पर किये हैं, चाहें वह वस्तु हों, वर्तन हो या खान-पान की वस्तुएं हो, यहां तक कि सुरक्षा के लिए हथियार हो या फिर खेती के काम में आने वाले उपकरण, रसोई घर की रोजमर्रा की जरूरत के सामानों को भी आवश्यकता के अनुसार बदला है।
समय-समय पर हुए बदलावों की कहानी कहता एक अद्वितीय ब्रज लोक कला एवं शिल्प संग्रहालय इस संग्रहालय में मानव जीवन के साथ वस्तुओं के बदलाव के गवाह इन वस्तुओं का संकलन कर यहाँ संरक्षित किया गया है जो कि मथुरा में वृन्दावन-छटीकरा मोड़ से राधाकुण्ड रोड पर स्थित है। यहाँ मानव की प्रारम्भिक आवश्यक वस्तुएं जो जीवन में काम आती रही हैं किन्तु अब न तो इनका कोई नाम जानता है, न ही कोई चलाना जानता है यहाँ तक ‌कि अब इनका उपयोग भी बंद हो चुका है, 
हाल ही में वसन्त पंचमी के दिन 14 फरवरी 2024 को उ0प्र0 ब्रज तीर्थ विकास परिषद् के उपाध्यक्ष पूर्व आई.पी.एस. माननीय शैलजा कान्त मिश्र जी ने इस अद्वितीय ब्रज लोक कला एवं शिल्प संग्रहालय का लोकार्पण किया इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि ब्रज के समग्र विकास के लिए ब्रज तीर्थ विकास परिषद् की स्थापना का संकल्प ब्रह्मर्षि देव रहा बाबा के आदेष पर हुआ, उनका आदेश था कि ब्रज की रक्षा के लिए कार्य करना होगा। तभी भारत सम्पूर्ण विश्व में सिरमोर बन सकेगा। मैं हमेशा उनके आदेश को अपने स्मरण में रख कर ब्रज की सेवा में लगा हुआ हूँ।
उन्होंने कहा कि लोक कला एवं शिल्प संग्रहालय पूर्व में भी बना जब बज्रनाभ जी महाराज ने समूचे ब्रज क्षेत्र को ही संग्रहालय बना दिया था, जो किन्हीं कारणों से लोप हो गया। ब्रज की लोककला और ब्रज के लोक गीतों में चेतना समाई हुई है, श्रीकृष्ण कालीन चेतना, उनका रूप, उनके शब्द, इसमें समाये हुए हैं। 
मोदी जी और योगी जी के अनुग्रह से कुछ विकास कार्य धरातल पर हैं, कुछ योजनाएं आने वाली हैं, उन्होंने कहा कि धन खर्च करके ब्रज को सिंगापुर तो बनाया जा सकता है, किन्तु तीर्थ नहीं बनाया जा सकता।
ब्रज लोक कला एवं शिल्प संग्रहालय में जो संग्रह किया जा रहा है उससे भी आगे श्रीकृष्ण के प्रति भाव को अपने हृदय में संग्रहित करने की आवश्यकता है, तब ही तीर्थ की स्थापना सम्भव हो सकेगी। सभी ब्रजवासी व उनके माध्यम से यहां आने वाले लोगों के मन में भगवान श्रीकृष्ण की सत्य निष्ठा, उनका सद्भाव को सभी में समाहित करने का प्रयास होना चाहिए। 
आप सभी ब्रजवासियों के कारण यह एक अच्छी शुरूआत है। आप सभी को मानना होगा कि भगवान ने हमें इस कार्य के लिए चैतन्य रूप में व्यवस्थित करने के लिए लगाया है। यहां कि हर बस्तु को, हर वृक्ष को संग्रहित करने की आवश्यकता है, हमें सत्य निष्ठा के साथ ब्रज के तीर्थत्व की बापसी का आन्दोलन शुरू करना होगा। 
इस अवसर पर ब्रज के मूर्धन्य विद्वान श्रीवत्स गोस्वामी जी ने उपस्थित जनसमूह को सम्बोधित करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण के प्रपौत्र बज्रनाभ जी ने महाभारत के बाद समूचे ब्रज को ही श्रीकृष्ण का संग्रहालय बना दिया था। 
जीवन्त संग्रहालय चैरासी कोस में धाम रूपी संग्रहालय बज्रनाभ जी ने ही बनाया, उसके बाद में ब्रजसेवी फेडरिक सामन ग्राउस ने मथुरा में संग्रहालय बनाया। उन्होंने कहा कि ब्रज एक सतत श्रृष्टि है तभी संवत् 2081 और सन् 2024 में भी ब्रज जीवन्त है। लोक के आधार पर ही शास्त्र की रचना हुई है। श्रीकृष्ण और उनसे जुड़ी कला साधना, आराधना में जितने शिल्प आते हैं। वह सब भी लोक की ही देन हैं।
तभी तो गाया जाता है कि 
‘‘अनौखों री जायो ललना, मैं वेदन में सुन आई, मैं खेतन में सुन आई’’
श्रीकृष्ण आज भी लोक और शास्त्र में जीवित हैं। ब्रज लोक कला एवं शिल्प संग्रहालय का संकल्प डाॅ0 उमेश चन्द शर्मा ने लिया जो की एक सराहनीय कार्य है। ब्रज संस्कृति यदि जीवन है, तो संग्रहालय भी जीवन्त है। संग्रहालय मानव जीवन से जुड़ी गतिविधियों का दर्पण है। 
इस अवसर पर सभी का आभार व्यक्त करते हुए डाॅ0 उमेश चन्द शर्मा ने कहा कि इस संग्रहालय की आधारषिला 07 अक्टूबर 2000 में रखी गयी थी, जिसमें ब्रज के महान संत महन्त की उपस्थिति थी, अनेक लोगों का योगदान इसमें रहा है, यहां प्रदर्शित कला और शिल्प को अभी पूरी तरह से नहीं रखा जा सका है। अभी और भी कला रत्न प्रदर्शित किये जाने बाकी हैं हम जल्द ही आम जन मानस के लिए उन्हें भी प्रदर्शित करने का प्रयास करेंगे। 
इस अवसर पर आचार्य पद्म नाभ गोस्वामी, विष्णु दास गोयल शोरा वाला, दीपक गोयल, आर. पी. यादव, सोहन लाल, दिनेष खन्ना, कपिल उपाध्याय, मुकेष शर्मा, उदयन शर्मा, राधावल्लभ मंदिर सेवायत आनंदलाल गोस्वामी, सुरेश चंद्र शर्मा, सुमनकांत पालीवाल, सुकृत गोस्वामी, सुनील शर्मा (पत्रकार), गोपाल शरण शर्मा, डाॅ0 विनोद बनर्जी, मुकेश गोतम, डाॅ0 शिवांगी गोतम, दीपक गोस्वामी, प्रियव्रत शर्मा, वीरेन्द्र सिंह, मुकेश गौतम, विनीत शर्मा, सतीश बघेल, सुप्रिया गोस्वामी, हेमू, रमाशंकर शर्मा, महेश प्रसाद, राजेन्ड एडवोकेट, सुरेन्द्र कौशिक, वीरपाल सिंह, हेमलता, सुमनलता, शान्तनु अमित, नन्द किशोर, सुनील सिंह, बाबा जयकृष्णदास, सुभाष, हुकुम चन्द तिवारी एडवोकेट, कवि अशोक अज्ञ, सत्य प्रकाश, डाॅ0 नीतू गोस्वामी, विज्येता चतुर्वेदी, बबूलू, मोहित गुप्ता, ब्रजेन्द्र सिंह, चन्द्र प्रकाश सिंह सिकरवार, प्रकाश, दीपक पं. सुरेश चन्द्र शर्मा, ब्रषभान गोस्वामी, पालिवाल, डॉ. रिपुसूदन मिस्त्री, रवि भाटिया, ओम प्रकाश डागुर, सत्येन्द्र नकुल, रंजीत, रामेन्द्र, श्रेया शर्मा, उभा शर्मा,, सीमा मोरवाल, रजत शुरला, मधु तोमर, श्रुति शर्मा, आदित्य राज, श्रीयश, गौरी शंकर शर्मा, प्रांशु, कमल, सतीश सिंह, नारायन सिंह, प्रेम पाल, ब्रजेन्द्र सिंह, राधावललम शर्मा, अमित, मीना, उमाशंकर श्रीवास्तव, अशोक अग्रवाल, कृष्ण बंसल, रेनु दत्ता, साधना गुप्ता, डॉ. अनुजा चैधरी, तुसार जैन, अनन्त स्वरूप बाजपेयी, पवन शर्मा, मयूर कौशिक, विजय विद्यार्थी आदि लब्ध प्रतिष्ठित नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डाॅ0 अंजू सूद ने किया।