श्री श्री नरहरि सेवा संस्थान ब्रज के साधु-सन्तों व महापुरूषों के वरदान का सुफल है। डॉ. उमेश चन्द्र शर्मा के मन में एक स्वप्न तैरता रहता था-ब्रज संस्कृति को विश्व संस्कृति से जोड़कर इसकी संभावनाओं का विस्तार किया जाये। इसकी चर्चा श्रीधाम वृन्दावन के तपोनिष्ठ साधु- सन्तों से करते-करते भावमग्न से हो जाते थे। श्री नरहरि दास जी महाराज की सन्निधि में 12 अगस्त 1982 को इस स्वप्न ने एक संकल्प का रूप धारण किया। उस संकल्प का नाम था “ब्रज लोक कला एवं शिल्प संग्रहालय“ इस संकल्प को क्रियान्वित करने के लिये ग्यारह वर्ष पर्यन्त अथक परिश्रम के साथ समूचे ब्रज का परिभ्रमण अध्येता-अन्वेषक की दृष्टि से किया गया, विविध ग्रंथागारों में आवश्यक अध्ययन तथा ब्रज व ब्रज के बाहर के अनेक विद्वानों से ब्रज संस्कृति और कला की सुरक्षा-संरक्षा व विकास के अनुशासनों पर चर्चा की गई, जिससे आशीर्वचन रूप में प्रोत्साहन और उचित परामर्श भी प्राप्त हुआ।
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ब्रज लोक कला एवं शिल्प संग्रहालय ब्रज क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपरागत शिल्पकला का अनमोल संग्रह है।
संग्रहालय की विरासत, संचालन और संरक्षण में समर्पित हमारे सम्मानित न्यासी।